कम्प्यूटर की पूरी जानकारी हिंदी में (Complete Information of Computer in Hindi me 

  1. परिचय (introduction)
  2. कम्प्यूटर क्या है (what is computer)
  3. कम्प्यूटर से क्या तात्पर्य है (what does computer stand for)
  4. कम्प्यूटर का विकास (development of computer)
  5. कम्प्यूटर की क्षमताएं (strenghts of computer)
  6. कम्युटर की सीमाएं (limitations of computer)
  7. कम्युटर के प्रयोग (fundamental uses of computer)
  8. कम्प्यूटर की पीढ़ियां (generations of computer)

परिचय (introduction)- आजकल हर जगह कम्प्यूटर विद्यमान है, कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो computer के बारे में नहीं जानता हो। आप किसी से भी यह सवाल पूछ लो की कंप्यूटर क्या है ? तो सायद ही कोई व्यक्ति ऐसा होगा जो इसके बारे में न जानता हो, इस धरती पर रहने वाला कोई भी व्यक्ति कंप्यूटर के अस्तित्व को नकार नहीं सकता। आपने जब किसी स्टोर से सामान लिया होगा तो देखा ही होगा, एक बार कोड रीडर आपके द्धारा ख़रीदे गए सामान पर बने बार कोड को जाँचता है और एक computer से जुड़ा हुआ प्रिंटर आपको बिल बनाकर देता है।क्या आप जानते है की एक बक्से के सामान दिखने वाली मशीन हमारी पूरी जीवन सैली बदल चुकी है। पोस्ट कार्ड का स्थान email ने ले लिया है, टिकट लेना, बैंकिंग के कार्य इन सब ने एक नया रूप ले लिया है। सब काम इतना आसान हो गया है मानो कोई जादुई सक्ति आदेश दे रहा हो, और सभी कार्य होता जा रहा हो, इसलिए हमारा भी फर्ज बनता है की हमारे जीवन को इतना सरल करने वाले दिव्य संरचना computer के बारे में छोटे-बड़े सभी बातों को जानें, तो आइये इस आर्टिकल में computer के बारे में अधिक से अधिक जानते है। 

computer 
कम्प्यूटर क्या है (what is computer)- सरल भाषा में कहा जाए तो कम्प्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक यंत्र (machine) या युक्ति है जो तार्किक  और अंकगणितीय क्रिया कलापों को संपन्न करता है व कह सकते है, की हमारे द्धारा दिए गए निर्देशों का पालन वा गणना करता हैआज कम्प्यूटर का उपयोग हर क्षेत्र में इतना बढ़ चूका है की इसके बिना सारा काम अधूरा सा है। पहले के computer कमरे के जितने बड़े आकर के हुआ करते थे, जो आज कल के सैकड़ो पर्सनल कंप्यूटरों के जितना ऊर्जा का खपत करते थे। पर आज एसा नहीं है अब computer के रूप में इतना परिवर्तन हो गया है की उसे कलाई में पहना जा सकता है छोटी सी बैटरी से संचालित किया जा सकता है। 

Embedded भी एक प्रचलित computer है जिसका उपयोग प्रायः मशीनों को कण्ट्रोल करने में किया जाता है उदाहरण के लिए लड़ाकू विमान से लेकर रोबोट, डिजिटल कैमरा व बच्चो के खिलौनों में भी देखा जा सकता है। 

कम्प्यूटर की क्षमताएं (Strengths of Computer)- आजकल कम्प्यूटर की क्षमताओं को उल्लेखित करना बताना बहुत ही आसान है। साधारण से साधारण व्यक्ति भी इसके क्षमताओं की गड़ना कर सकता है।  इसके अनुप्रयोगों को देखते हुए इसकी क्षमताये हो सकती है तो आइये इसके बारे में जानते है -

शुद्धता (accuracy)- कम्प्यूटर सभी कार्य को बिना किसी गलती के कर सकता है, वैसे तो computer द्धारा गलती किये जाने के कई उदाहरण है परन्तु यह गलती computer के डाटा एंटर करते है या तो प्रोग्राम के डेवलॅपमेंट के समय हुई रहती है, क्योकि कम्प्यूटर खुद से कोई गलती नहीं करता। 

गति (speed)- कम्प्यूटर की गति बहुत तेज़ होती है यह कोई भी कार्य सेकेंडो में करता है। गुणा भाग जोड़ घटाव आदि करोड़ो कार्य क्षण भर में कर लेता है। उदाहरण के लिए अगर 250x650 को गुना करने के लिए किसी मनुष्य को कहा जाए तो वह 2 से 3 मिनट लगा देगा वही कार्य computer द्धारा पल भर में हो जाएगा। 

स्वचालन (Automation)- computer अपना कार्य एक बार प्रोग्राम (निर्देशों के एक समूह) के एक बार लोड हो जाने पर स्वयं ही कर लेता है उदहारण के लिए किसी डाटा एंट्री प्रोग्राम पर कार्य कर रहे ऑपरेटर को स्वयं रिपोर्ट तैयार करने की आवस्यकता नहीं है, क्योकि computer प्रविस्ट डाटा के आधार पर स्वयं ही रिपोर्ट देता रहता है।

सार्वभौमिकता (Versatility)- Computer अपनी सार्वभौमिकता गुण के कारण बड़ी तेज़ी से सारी दुनिया में छाता जा रहा है। computer को गणितीय कार्यो में उपयोग करने के साथ-साथ व्यावसायिक कार्यो के उपयोग में भी लाया जा रहा है, computer में प्रिंटर संयोजित कर सभी प्रकार की सूचनाएं कई रूपों में प्रस्तुत किया जा सकता है, computer को टेलीफोन लाइन से जोड़कर सारी दुनिया से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकता है तथा कंप्यूटर की सहायता से तरह तरह के खेल खेले जा सकते है। 

उच्च स्टोरेज क्षमता (High storage capacity)- एक कम्प्यूटर की संग्रह क्षमता बहुत अधिक होती है हम उसमे text फोटो, प्रोग्राम, डाटा, रिकॉर्ड, आइडियो, वीडियो आदि का कई वर्षो तक संग्रह करके रख सकते है और जब मन चाहे तब कुछ ही सेकंड में अपने उपयोग में ला सकते है। 

कर्मठता (Diligence)- हम और आप किसी कार्य को करते रहें तो कुछ ही घंटो में ऊब जाते है जबकि computer किसी भी कार्य को कई घंटो कई दीनो, महीनो सालों तक कर सकता है, इसके बावजूद न तो उसके कार्य क्षमता में कमी आएगी ना तो उसके गुणवत्ता में। कंप्यूटर किसी भी कार्य को बिना किसी भेद भाव के करता है, चाहे वह कार्य रुचिकर हो या न हो। 

विश्वनीयता (Reliability)- ऊपर computer के जितने भी गुण बताये गए है जैसे गति, कर्मठता, शुद्धता, सार्वभौमिकता, स्वचालन, स्टोरेज ये सभी computer में विद्यमान है जो इसे विश्वनीय बनाती है। सभी व्यवसाय में लोग कंप्यूटर का भरोसा करते है और इसका उपयोग करते है।

कम्प्यूटर की कुछ सीमाएं (limitations of computer)

दोस्तों वैसे तो computer की कमियाँ निकलना बहुत ही मुश्किल काम है। फिर भी आप ध्यान देकर इसके कमियों के बारे में विचार किया जाए तो कुछ कमिया है, जो जरुरी भी है, क्योकि आप जानते है की computer एक मानव निर्मित यंत्र है। वैसे भी कमियों के बगैर किसी प्रणाली की कल्पना सायद नहीं की जा सकती है। 
तो आइये कम्प्यूटर की उन कमियों को जानते है -

आत्मरक्षा करने में अक्षम (Unable in self protection)- computer चाहे जितना भी सक्तिशाली हो जाए उसका कंट्रोल हमेशा मानव के हाँथ में ही है। मानव उसे जैसा चाहे वैसा यूस कर सकता है व नियंत्रित कर सकता है। उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति अपना ई-मेल अकॉउंट बनाता है और दूसरा व्यक्ति अगर उस ई-मेल का पासवर्ड जानता है तब वह उस मेल को खोल सकता है 
अब ये समझे - किसी व्यक्ति के स्थान पर कोई दूसरा व्यक्ति उसके ATM से पैसे निकाल लेता है तब computer ये नहीं देखता की पैसा किसने निकाला, वह ये देखता है पासवर्ड सही है या नहीं। इसी वजह से जहा computer के इतने सारे बातो से विस्वनियता बनती है, तो दूसरी ओर उसकी विश्वनीयता पर सवाल भी खड़ी करती है। 

बुद्धिमता की कमी (Lack of intelligence)- एक तरह से देखा जाए तो कंप्यूटर उस मुर्ख नौकर की तरह है जिसे जाओ बाज़ार से सब्जी ले लो बोलने पर सब्जी तो ले लेगा, लेकिन उसे घर लेकर नहीं आएगा। क्योकि सवाल यह उठता है की हमने उसे सब्जी लेने को कहा घर लाने को नहीं बोला। computer का काम यूजर के निर्देशों को एक्जिक्यूट करना है, उसे जितना कहा जाए वह करेगा लेकिन न उससे ज्यादा करेगा न कम, कहने का मतलब यह है की computer के अंदर सामान्य बोध नहीं होता। 

चुकी आज के computer वैज्ञानिक कृतिम बुद्धिमता के बारे में शोध वगरा कर रहे है, तो देखते है की आगे चल के क्या परिणाम निकलता है। हालांकि एक मानव बुद्धिमता की तुलना में मसिनी बुद्धिमता कभी साथ नहीं हो पायेगा। 

कम्प्यूटर का विकास (Development of computers)


ऐबाकस (The Abacus)- computer का इतिहास लगभग 3000 वर्ष पुराना है जब चीन में एक गणना यंत्र 'एबाकस' का आविष्कार हुआ। यह एक यान्त्रिक डिवाइस (Machanical device) है, जो आज भी चीन जापान सहित एशिया की अनेक देशों में अंकों की गड़ना के लिए काम आती है। एबाकस जोड़ने वाली मशीनो (Adding Machines) तथा computer के लिए आधार सिला थी। ऐबाकस तारों (wires) का एक फ्रेम होता है। इन तारों में बीड (पक्की मिट्टी के गोल टुकड़े इनमे छेद हो) पिरोये रहते है। सुरुवात में एबाकस को व्यापारी गणना करने के काम में उपयोग किया करते थे। यह मसिनी अंकों के जोड़, घटाव, गुणा, भाग आदि कार्य करने के काम आती है।

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
abacus
ब्लेज पास्कल तथा पास्कलाइन (Blaise pascal and the pascaline)

अलग-अलग सताब्दियों बाद अनेक यांत्रिक मसीने गणना के लिए विकशित की गयी। सत्रहवीं सताब्दी में फ्रांस के गणितज्ञ ब्लेज पास्कल (Blaize Pascal) ने एक डिजिटल गणना यंत्र (Meehanical digital calculator) सन उन्नीस सौ पैतालिश में विकशित किया। इस मशीन को (Adding machine) कहते थे, क्योकि सी सिर्फ जोड़, घटाव ही कर सकती थी। यह मशीन घडी (Watch) और ओड़ोमीटर (odometer) के सिद्धांत पर कार्य करती थी। इसके कई दांते दार चकरिया (Toothed wheels) थी जो घूमते रहती थी। चकरियों के दांतो (teeth) पर 0 से 9 तक के अंक छपे रहते थे। प्रत्येक चकरी (wheel) का एक स्थानीय मान (Positional/Place value) जैसे इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि था। 

इसके प्रत्येक चकरी स्वयं से पिछली चकरी के एक चक्कर लगाने पे एक अंक घूमती थी ब्लेज पास्कल के इस एडिंग मशीन (adding machine) को पास्कलाइन (pascaline) कहते है जो सबसे पहले यांत्रिकीय गणना-यंत्र (Mechanical calculating machine) था, जिसका उपयोग आज भी स्कूटर व कार के स्पीडोमीटर (speedometer) के रूप में होता है। 

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
pascaline

सन सोलह सौ चौरानवे में जर्मन गणितज्ञ व दार्शनिक Gottfried wilhelm von leibnitz ने पास्कलाइन का विकशित रूप तैयार किया जिसे रेकनिग मशीन (Reckoning machine) या लेबनीज़ चक्र (leibnitz wheel) कहते है यह मशीन अंको के जोड़ घटाव के साथ-साथ गुणा व भाग भी करती है। इसके पश्चात, इसी तरह एक यांत्रिक गणना-यंत्र एरिथ्मोंमीटर (Arithmometer) थॉमस डे कॉल्मर (Thomas de colmar) ने उन्नीस सौ अस्सी में बनाया था। 

जेकार्ड्स लूम (Jacquards loom)

सन अठारह सौ एक में फ्रांसीसी बुनकर जोसेफ जेकार्ड (Joseph jacquard) ने कपडे बुनने के ऐसे लूम का आविष्कार किया जो कपड़ो की डिज़ाइन व पैटर्न खुद ही देता था, इस loom की विशेसता यह था की यह कपडे के पैटर्न को कार्डबोर्ड के छेदयुक्त पंचकार्डी से नियंत्रित करता था। पंचकार्डो में की उपस्थिति व अनुपस्थिति द्धारा धागो को निर्देशित किया जाता था। 

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
Jacquard loom


जेकार्ड के इस loom द्धारा दो विचारधाराएं प्रस्तुत की गयी जो आगे computer के विकाश में उपयोगी सिद्ध हुई। जिसमे पहला यह था की सुचना को पंचकार्ड पर कोडेड किया जा सकता है और दूसरी विचारधारा यह थी की पंचकार्ड पर संग्रहित सुचना निर्देशों का समूह है जिससे पंचकार्ड को जब भी काम में लिया जाएगा तो निर्देशों का यह समूह एक प्रोग्राम (program) के रूप में करेगा। 

चार्ल्स बैवेज और उनकी इंजन (Charles Babbage and his Engines)

आप जानते है की Computer के इतिहास में उन्नीसवीं सताब्दी के प्रारंभिक समय को स्वर्णिम युग माना जाता है, अंग्रेजी गणितज्ञ चार्ल्स बैवेज (Charles Babbage) ने गणना के लिए बनी हुई सारणियों में त्रुटि को देखते हुए एक यांत्रिक गणना मशीन विकशित करने की आवश्यकता समझी। क्योकि यह मशीने हाँथ से बनाई गयी थी इसलिए इसमें अनेक त्रुटि आ जाती थी। 

चार्ल्स बैवेज ने सन अठारह सौ बाइश में एक मशीन का निर्माण किया जिसका खर्चा ब्रिटश सरकार ने उठाया था, उस मशीन का नाम डिफरेंस इंजिन रखा गया, जो भाप से चलती थी और इसमें गेयर व सॉफ्ट लगे हुए थे। 

इसके बाद अठारह सौ तैतीस में चार्ल्स बैवेज ने डिफ़रेंस इंजिन को नया रूप दिया यह एक सक्तिसाली मशीन था इसको एनालिटिकल इंजिन (Analytical Engine) नाम दिया गया। यह मशीन कई प्रकार के गणना कार्य करने में सक्षम थी, पचकार्डो पर संग्रहित निर्देशो के अनुसार कार्य करने में सक्षम थी।

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
analytical engine 

बैवेज का computer के विकाश में बहुत बड़ा योगदान रहा। बैवेज का एनालिटिक इंजिन आधुनिक कम्प्यूटर का आधार बना इसी कारण चार्ल्स बैवेज को computer का जनक (Father of Computer) कहा जाता है। 

एडा ऑगस्टा (Ada Augusta)

चार्ल्स बैवेज के एनालिटिक इंजिन को शुरू में बेकार समझा गया, और उसकी कमियां निकाली गयी, जिससे चार्ल्स बैवेज को बहुत निराशा हुई परन्तु अप्रत्यासित रूप से एडा ऑगस्टा जो की प्रसिद्ध इंग्लिश कवि लॉर्ड बायरन (lord Byron) की पुत्री थी, ने बैवेज के उस एनालिटिकल इंजिन में Computation instructions विकसित करने में मदद की। जिस प्रकार चार्ल्स बैवेज को computer विज्ञान का जनक होने का गौरव प्राप्त है उसी प्रकार विश्व की पहली प्रोग्रामर होने का श्रेय एडा ऑगस्टा को जाता है। ऑगस्टा को सम्मान देने के लिए एक प्रोग्राम भाषा का नाम एडा रखा गया। 

हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith)

सन अठारह सौ नव्वे में computer के इतिहास में अमेरिका की जनगणना का कार्य एक महत्वपूर्ण घटना थी। सन अठारह सौ नव्वे से पहले जनगणना कार्य पारम्परिक तरीके से किया जाता था, सन अठारह सौ अस्सी में सुरु की गयी जनगणना में 7 साल का समय लगा था। कम समय में जनगणना करने के लिए herman hollerith ने एक मशीन बनाई जिसमे पंचकार्डो को विधुत द्धारा संचालित किया गया, इस मशीन की मदद से 3 वर्ष में ही जनगणना हो गया। सन 1896 में हॉलेरिथ ने पंचकार्ड यंत्र बनाने की एक company टेबुलेटिंग मशीन कम्पनी (Tabulating machine company) स्थापित की। सन 1911 में इस company का अन्य कंपनी के साथ विलय हुआ फिर इसका नाम बदलकर 'Computer Tabulating Recording Company' हो गया। 

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
punch card
सन 1924 में इस कंपनी का नाम फिर से बदल दिया गया और इंटरनेशनल बिजनेश मशीन (International Business machine) हो गया। जो आज के समय में कम्प्यूटर निर्माण में अग्रणीय company है। 

डाक्टर हॉवर्ड आईकेन और मार्क-I (Dr. Howard Aiken and the Mark-I)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
mark

सन 1940 में विधुत-यांत्रिक computing शिखर पर पहुंच चुकी थी। आई. बी. एम. (IBM) के चार शीर्ष इंजीनियरों व डाक्टर हावर्ड आईकेन ने 1944 में एक मशीन को विकशित किया यह विश्व का सबसे पहला विधुत यांत्रिक कम्प्यूटर था इसका नाम आटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड केल्कुलेटर (Automatic sequence controlled calculator) रखा गया, इसे हॉवर्ड विश्वविद्यालय को सन 1944 के फरवरी महीने में भेजा गया जो विश्वविद्यालय को 7 अगस्त 1944 को प्राप्त हुआ, इसी विश्वविद्यालय में इसका नाम मार्क-I पड़ा। 
मार्क-I में 500 मिल लम्बाई के तार व 30 लाख विधुत संयोजन (Connections) थे, यह 6 सेकेण्ड में एक गुणा (multiplication) और 12 सेकेंड में एक भाग (Division) की क्रिया कर सकता था। 

19 वी सताब्दी के चौथे दशक के मध्य में इलेक्ट्रॉनिक अवधारणाएँ तेज़ी से बढ़ रही थी, इससे computer भी अछूते नहीं थे आई. बी. एम. मार्क-I इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी आने के साथ ही पुराना हो गया, इस technology में केवल विधुत धारा द्धारा निर्मित संकेत ही आवस्यकताओं को प्रोसेस करते थे तथा इन प्रद्योगिकी पर आधारित डिवाइसेज़ में किसी movable पुर्जे की आवस्यकता नहीं थी।

एटानासोफ बेरी कम्प्यूटर (The Atanasoff-Berry Computer)

सन 1945 में एटानासोफ और क्लीफर्ड बेरी ने एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन को विकशित किया जिसका नाम ए. बी. सी. (ABC) रखा गया जिसमे ABC (Atanasoff-berry computer) का संक्षिप्त रूप है यह सबसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल computer था। 

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
Atanasoff-berry computer
डिजिटल अवधारणा (concepts) तब भी वही थी जब मशीने यांत्रिक (mechanical) या विधुत-यांत्रिक (Electro-mechanical) होती थी 1935 में कोनार्ड जयुज (Konard-zuse) जो जर्मन थे ने पहला डिजिटल computer द्विधारी अंकगणित तथा प्रोग्राम नियंत्रण का प्रयोग कर बनाया। इसका नाम जेड प्रथम (Z-1) था, यह एक यांत्रिक मशीन थी। बाद में इन्होंने एक मशीन जेड द्वितीय (Z-2) बनाई जिसमे उन्होंने विधुत चुम्बकीय रिलेज का प्रयोग किया। 

1945-46 के दौरान, जान विलियम मुचली (John william mauchly) तथा जे.पी. एकर्ट (j,p.eckert) ने सबसे पहले सामान्य उद्देश्यी computer (General Purpose Computer) का विकाश पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय (University of pennsylvania) में किया जिसका नाम एनिएक (ENIAC) रखा गया जिसका पूर्ण रूप Electronic Numeric Integrator And Computer है। 

कम्प्यूटर की पीढ़ियां (Generations of computer)


computer की पीढ़ियों के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है सभी को इसके पीढ़ी, विकास की जानकारी रखनी चाहिए तो चलिए इसके बारे में जानते है -

कम्प्यूटर के विकाश को निम्न पांच तरीके से बाट सकते है। 

प्रथम पीढ़ी (first generation) - 1946 से 1956 तक 
द्वितीय पीढ़ी (second generation) - 1956 से 1964 
तृतीय पीढ़ी (third generation) - 1964 से 1971
चतुर्थ पीढ़ी (fourth generation) 1971 से वर्तमान  
पंचम पीढ़ी (fifth generation) वर्तमान से भविष्य 

कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी (first generation of computer) 

Computer की प्रथम पीढ़ी का प्रारम्भ सन 1946 एकर्ट और मुचली के एनिएक (ANIAC) कम्प्यूटर के निर्माण से हो गया था। इस पीढ़ी के कम्प्यूटरो में वैक्युम Tube का प्रयोग किया जाता था जिसका आविष्कार सन 1904 में किया गया इस पीढ़ी में एनिएक के अलावा और कई कम्प्यूटरो का निर्माण हुआ जिनके नाम निम्न है। 

EDSAC - Electronic delay storage automatic calculator. 
EDVAC - Electronic discrete variable automatic computer.
UNIVAC - Universal automatic computer 
UNIVAC - 1

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
UNIVAC - 1
प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरो के लक्षण-
  • स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक ड्रम का प्रयोग किया जाता था। 
  • ठंढा रखने के लिए बहुत सारे एयर कंडीश्नरो का प्रयोग किया जाता था। 
  • वेक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया जाता था। 
  • विस्वनियता कम थी। 
  • पंचकार्ड पर आधारित थी। 
  • मशिनी और असेम्ब्ली भाषा में प्रोग्राम। 
कम्प्यूटरो की द्वितीय पीढ़ी (second generation of computer)

ट्रांजिस्टर के उपयोग से कम्प्यूटरो की दूसरी पीढ़ी की शुरुआत हुई थी, विलियम शाकले (William shockley) ने ट्रांजिस्टर का आविष्कार सन 1947 में किया था जिसका उपयोग द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरो में वेक्यूम ट्यूब के स्थान पर किया जाने लगा। ट्रांजिस्टर के उपयोग ने कम्प्यूटरो को वैक्यूम ट्यूब के अपेक्षा अधिक गति एवं विश्वनीयता प्रदान की। 

द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटरो के लक्षण -
  • वैक्यूम ट्यूब के जगह ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया। 
  • तेज़ी और विश्वसनीय थी। 
  • प्रथम पीढ़ी वाले से थोड़ा कम खर्चीले थे। 
  • स्टोरेज डिवाइस प्रिंटर एवं आपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग। 
  • पहले वाले से आकार में छोटे और कम ऊर्जा खपत वाले थे। 
  • COBOL एवं FORTRAN जैसे उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओ का प्रयोग। 

कम्प्यूटरो की तृतीय पीढ़ी (third generation of computers)

कम्प्यूटरो की तीसरी पीढ़ी की शुरुआत 1964 में हुई। इस पीढ़ी ने कम्प्यूटरो को आई. सी. प्रदान किया, आई. सी. अर्थात integrated circuit का आविष्कार टेक्सास इंस्टूमेंट कंपनी (Texas instrument company) के एक अभियंता जैक किल्बी (jack kilby) ने किया था इस पीढ़ी के computer में 
ICL 2903
ICL 1900
UNIVAC 1108
SYSTEM 1360 प्रमुख थे। 

तृतीय पीढ़ी के कम्प्यूटरों की लक्षण -
  • अधिक विश्वनीय थे। 
  • उच्चस्तरीय भाषाओ का अधिक से अधिक प्रयोग। 
  • integrated circuit का प्रयोग। 
  • आसान रख-रखाव। 
  • प्रथम व दूसरी पीढ़ी से आकार एवं वजन कम। 

कम्प्यूटरों की चतुर्थ पीढ़ी (fourth generation of computer)

सन 1971 से लेकर आज तक के कम्प्यूटरों को चतुर्थ पीढ़ी में रखा गया है, इस पीढ़ी में integrated circuit को अधिक विकशित किया गया जिसे large integrated circuit कहा जाता है। अब लगभग 300000 ट्रांजिस्टरों के बराबर का परिपथ एक इंच के चौड़ाई भाग में समाहित हो सकता है। इस आविष्कार से पूरी सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट एक छोटी सी चिप में आ गयी जिसे माइक्रो प्रोसेसर कहा जाता है। इसके उपयोग वाले कम्प्यूटरों को माइक्रो कम्प्यूटर कहा गया। 

ALTAIR 8800 सबसे पहला माइक्रो कंप्यूटर था जिसे मीट्स (MITS) नामक कम्पनी ने बनाया था। बिल गेट (Bill Gates) जो उस समय हॉवर्ड विश्विद्यालय के छात्र थे ने इसी computer पर बेसिक भाषा (basic language) को स्थापित (install) किया था। इस सफल प्रयास के बाद बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी की स्थापना की जो की दुनिया भर में सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी कंपनी है। 

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
bill gates
चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटरों के लक्षण -

  • अधिक विस्वसनीय, प्रभावशाली और गतिशील। 
  • आकर में बहुत छोटा। 
  • अधिक मेमोरी क्षमता। 
  • कम्प्यूटरों के विभिन्न नेटवर्क का विकास। 
  • very large scale integration का उपयोग। 
  • मूल्य कम जिससे साधारण व्यक्ति भी खरीद सके। 

कम्प्यूटरों की पांचवी पीढ़ी (Fifth generation of computer)

इस पीढ़ी में अभी चल रहे शक्तिशाली, उच्च तकनिकी और भविष्य में आने वाले कम्प्यूटरों को रख सकते है, वैज्ञानिक लगातार कोशिस कर रहे है की computer को कृतिम बुद्धिमता (Artificial intelligence) दी जा सके क्योकि आज के समय में कम्यूटरों का बहुत विकास हो चूका है। हर जगह जैसे अकाउन्टिग, भवन निर्माण, इंजीनियरिंग, अंतरिक्ष विज्ञान, शोध आदि अनेक कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। 

पांचवी पीढ़ी में कम्प्यूटरों को परस्पर संयोजित किया गया ताकि डाटा और सुचना की आपस में सांझेदारी व आदान-प्रदान हो सके। नए इंटीग्रेटेड सर्किट Ultra large integrated circuit ने पुराने सर्किट Very large scale integrated circuit को रिप्लेस करना शुरू कर दिया। इस पीढ़ी में कंप्यूटर के आकार को घटाने की लगातार कोसिस की गयी और सफलता भी प्राप्त हुई उदाहरण स्वरुप हम घडी के आकार में भी computer को देख सकते है। 

पोर्टेबल computer और internet की मदद से हम जब भी जहा से भी चाहें डॉक्यूमेंट और पैसे का लेंन-देन कर सकते है। 

पांचवी पीढ़ी के कम्प्यूटरों के लक्षण -

internet का प्रयोग - दुनिया भर के computer नेटवर्क internet से जुड़े होते है, इसी लिए हम कंही से भी, घर बैठे सभी विषयो की लाखो करोङो सूचनाएं घर पर ही प्राप्त कर सकते है। 

कम्प्यूटरों के अनेक आकार (Different size of computer) - आज के  कम्प्यूटर हमारे सुविधा के अनुसार विभिन्न आकार में उपलब्ध है जैसे Desk top 
Lap top 
Palm top  आदि।

मल्टीमीडिया (Multimedia)- इस पीढ़ी में मल्टीमीडिया का विकास हुआ है जाए - sound recording, graphics या text आदि है।

नए-नए अनुप्रयोग (New application)- आप जानते है की रोजाना नए नए अनुप्रयोग हमारे काम को आसान करने के लिए शामिल किये जाते है। 

कम्प्यूटर के प्रकार (Types of computer)
दोस्तों आइये कंप्यूटर के विभिन्न प्रकारों पर चर्चा करते है -

computer हर जगह उपयोग में लाई जाने वाली यंत्र है, इसलिए अलग-अलग जगहों, क्षेत्र में इसके अलग-अलग प्रकार मौजूद है। जैसे काम के आधार पर computer को एनालॉग, डिजिटल व हाइब्रिड में बाट सकते है, ठीक उसी प्रकार आकार के अनुसार माइक्रो, वर्कस्टेशन, मिनी, मेनफ्रेम, और सुपर computer में बाट सकते है। 

इस मुश्किलों को देखते हुए इस तरह से इन्हे क्रम में बाटते है। 
  • कार्यप्रणाली (Mechanism)
  • उद्देश्य (Purpose)
  • आकार (Size)
 
कार्य प्रणाली के आधार पर कम्प्यूटरों का प्रकार (Types of computer based on mechanism)

इसमें एनालॉग, डिजिटल व हायब्रिड कंप्यूटर आ जाएंगे। 

एनालॉग कम्प्यूटर (Analog computer)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
एनालॉग उन कम्प्यूटरों को कहा जाता है जो भौतिक मात्राओं जैसे - दाब, तापमान, लम्बाई आदि को मापकर उसके परिमाप को अंको में व्यक्त करे। ये कंप्यूटर किसी
राशि का माप तुलना के आधार पर करते है जैसे की एक थर्मामीटर कोई गणना नहीं करता है यह पारे के सम्बंधित प्रसार की तुलना करके शरीर के तापमान को मापता है। 

एनालॉग computer खासतौर पर विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उपयोग किये जाते है क्योकि इन जगहों पे माप व मात्राओ का अधिक प्रयोग होता है। परन्तु ये कम्प्यूटर केवल अनुमानित परिमाप ही देते है। जैसे पेट्रोल पंप में लगा कम्प्यूटर पम्प से निकले पेट्रोल की मात्रा को मापता है और लीटर में दिखाता है और उसके मूल्य की गणना करके स्क्रीन पर दिखाता है। 

डिजिटल कम्प्यूटर (Digital computer)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
digital computer
डिजिटल कंप्यूटर वह होता है जो अंको की गणना करता है, ज्यादातर लोग डिजिटल computer पर ही विचार करते है। यह कंप्यूटर व्यापार, बजट बनाना आदि ज्यादातर कार्य में उपयोग में लाया जाता है। डिजिटल कम्प्यूटर डाटा व प्रोग्राम को 0 व 1 में परिवर्तित करके उनको इलेक्ट्रॉनिक फार्म में ले आता है। 

हायब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid computer)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
hybrid computer
हायब्रिड का तात्पर्य अनेक गुण धर्म युक्त होना है, इसमें एनालॉग कम्प्यूटर व डिजिटल कम्प्यूटर दोनों के गुण होते है इसलिए इसे हायब्रिड computer कहते है जैसे कम्प्यूटर की एनालॉग डिवाइस किसी रोगी के लक्षणों अर्थात तापमान, रक्तचाप आदि को मापति है। ये परिमाप बाद में डिजिटल पार्ट के द्धारा अंको में बदले जाते है। इस प्रकार रोगी के स्वास्थ्य में आये बदलाव का तत्काल परीक्षण किया जा सकता है।   


उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटरों का प्रकार (Types of computer based on purpose)

कम्प्यूटरों को उनके कार्य करने के उद्देश्य के आधार पर सामान्य उद्देश्य व विशेष उद्येश्य में बाटा जा सकता है। 


सामान्य उद्देश्य वाली कम्प्यूटर (General purpose computer)- सामान्य उद्द्येशी computer उन्हें कहा जा सकता है जिनके अनेक प्रकार की कार्य करने की क्षमता होती है लेकिन ये वर्डप्रोसेसिंग से पत्र व दस्तावेज तैयार करना दस्तावेजों को प्रिंट करना, डाटाबेस बनाना जैसे सामान्य कार्य ही इसके द्धारा संपन्न होता है। सामान्य उदेस्य कम्प्यूटर के internal circuit में लगे सी.पी.यु. (CPU) की कीमत भी कम होती है। इन कम्प्यूटरों में हम किसी वैशेस application के लिए अलग से डिवाइस नहीं जोड़ सकते क्योकि इनमे CPU की क्षमता लिमिटेड होती है। 


विशेष उद्देस्य कम्प्यूटर (Special purpose Computer)- यह ऐसे कम्प्यूटर होते है जिन्हे विशेष कार्य के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसमें CPU की क्षमता आपके कार्य के हिसाब से होती है की आप इससे क्या कार्य लेना चाहते है। इसमें अगर अनेक CPU की आवस्यकता हो तो इसके संरचना में परिवर्तन कर अनेक CPU वाला कर दिया जाता है। जैसे - Music recording करने के लिए किसी किसी Studio में लगाया जाने वाला computer विशेष उदेस्य कम्प्यूटर (Special purpose computer) होगा। इसमें music से सम्बंधित उपकरणों की जोड़ा जा सकता है, जिससे music में अच्छा से अच्छा प्रदर्शन हो सके। 

आइये special कम्प्यूटर के कुछ स्थानों पे कार्य को जानते है। 

  • चिकित्सा में। 
  • शोध व अनुसंधान में। 
  • यातायात नियंत्रण में। 
  • कृषि विज्ञान में। 
  • युद्ध में। 
  • अंतरिक्ष विज्ञान में। 
  • इंजीनियरिंग में। 
  • मौसम विज्ञान में। 
  • समुद्र विज्ञान में।  

आकर के आधार पर कम्प्यूटरों के प्रकार (Types of computer based on size)

माइक्रो कम्प्यूटर (Micro computer)

तकनिकी के क्षेत्र में सन उन्नीस सौ सत्तर में एक क्रांतिकारी आविष्कार हुआ, यह आविष्कार microprocessor का था जिसके उपयोग से सस्ती कम्प्यूटर प्रणाली बनाना संभव हुआ। ये कम्प्यूटर एक डेस्क (Desk) अथवा एक ब्रीफकेश में भी रखे जा सकते है। और ये छोटे कम्प्यूटर माइक्रो कंप्यूटर कहलाते है। माइक्रो कम्प्यूटर आकार में छोटे व सस्ते भी होते है इसलिए इसे घर में या घर से कंही बाहर office आदि जगह ले जाया जा सकता है। इसलिए इसे पर्सनल कम्प्यूटर (personal computer) या P.C. कहते है। 
माइक्रो कम्प्यूटर घर में स्कूल दफ्तरों में लगाए जाते है घर में इसे आप घर के बजट का ब्यौरा के लिए या फिर मनोरंजन के लिए उपयोग में ला सकते है। और विद्यालयों में इसका उपयोग विद्यार्थियों के लिए प्रश्न पत्र बनाने व शिक्षा देने के लिए अनेक प्रकार से उपयोग में ला सकते है। साथ ही दफ्तर में फाइल बनाने के लिए प्रोजेक्ट, पत्र लेखन आदि कार्य के लिए उपयोग में ला सकते है। 
व्यापार में माइक्रो कम्प्यूटर का व्यापक उपयोग है, चाहे व्यापार बड़ा हो या छोटा दोनों स्थिति में माइक्रो कंप्यूटर का उपयोग किया जाता है। छोटे व्यापार में यह किये गए व्यापार का ब्यौरा रखता है, पत्र व्यवहार के लिए पत्र तैयार करता है उपभोक्ता के लिए बिल बनाकर देता है और रोजाना का Accounting कार्य करता है। बड़े व्यापारी इसे वर्ड प्रोसेसिंग (Word processing) और फाइल मेंटनेंस में उपयोग करते है। 
माइक्रो कम्प्यूटर में एक ही CPU लगा होता है, वर्तमान में देखा जाए तो इसी कम्प्यूटर का तेज़ी से विकास हो रहा है। इसी के फलस्वरूप माइक्रो कम्प्यूटर एक पुस्तक व फोन के आकार साथ ही घडी के आकार में भी आ रहें है, ये सामान्य बजट व कीमत से लेकर अधिक कीमत पर भी उपलब्ध है। 
computer के आकारों के बारे में जानते है -
  • डेस्कटॉप कम्प्यूटर (Desktop computer)
  • लैपटॉप, नोटबुक (Laptop, notebook)
  • पामटॉप कम्प्यूटर (Polmtop computers)

डेस्कटॉप कम्प्यूटर (Desktop computers)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
desktop computer
पर्सनल कम्प्यूटर का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाने वाला प्रकार डेस्कटॉप कम्प्यूटर है, डेस्कटॉप के नाम से ही पता चल जा रहा है की इस कम्प्यूटर को डेस्क पर सेट किया जा सकता है। और वही से कार्य किया जा सकता है। इसमें एक सी.पी.यु. (एक कैबिनेट जो मदरबोर्ड व अन्य भागों से ढका रहता है) मॉनिटर, कीबोर्ड और माउस होते है। डेस्कटॉप कम्प्यूटर की कीमत कम होती है पर इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल होता है, आज के समय में आप इसे 20 से 25 हजार में खरीद सकते है।

नोटबुक व लेपटॉप (Notebook and Laptop)

कम्प्यूटर-Computer-क्या-है
laptop
नोटबुक और लेपटॉप वैसे तो एक ही होते है लेकिन कई कंपनियों द्धारा लैपटॉप में अन्य फीचर्स एड करके उसे नोटबुक से मंहगें दामों में बचते है। डेस्कटॉप कम्प्यूटर से भिन्न, नोटबुक तथा लेपटॉप में कुछ भी अलग से नहीं होता है। सभी इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसिंग युक्तियाँ एक डिब्बे में समावेशित होती है जो आपकी यात्रा में प्रयोग किये जाने वाली ब्रीफकेश जैसे लगती है। इसे आप यात्रा के समय कुर्सी पे बैठके गोद में लेपटॉप को रख कर संचालित कर सकते हो। इसी लिए इसे लेप+टॉप अर्थात गोद के ऊपर कहा जाता है। इसका वजन भी ज्यादा नहीं होता एक किलो से भी कम वजन के होते है ये डेस्कटॉप के हिसाब से थोड़े महंगे होते है पर इसका फायदा है की आप इसे कही भी ले जा सकते हो। इसमें बैटरी लगा होता है जिससे आप 4 से 5 घंटा आराम से उपयोग कर सकते है।

पामटॉप कम्प्यूटर (Palmtop computer)

पामटॉप सबसे अधिक पोर्टेबल पर्सनल computer होते है जो आपके हथेली में पकडे जा सकते है, इसलिए इन्हे पॉकेट कम्प्यूटर भी कहते है। पामटॉप कार्यालयों में प्रचलित नहीं है। अब पामटॉप कई स्वरुप में उपलब्ध है। ये टेबलेट पी.सी. तथा पी. डी. ए. हो सकते है। 

टेबलेट पी. सी. (Tablet PC)

टेबलेट पी. सी. अधिक पोर्टेबल और लैपटॉप कंप्यूटर के ही गुण वाले होते है, ये लेपटॉप की तुलना में अधिक हल्के होते है तथा निर्देशों को इनपुट करने के लिए डिजिटल पेन का प्रयोग करते है। यूजर निर्देशों को सीधा-सीधा स्क्रीन पर लिख सकता है। टेबलेट पी सी में पूर्व निर्मित माइक्रोफोन तथा विशिस्ट सॉफ्टवेयर होता है, जो इनपुट को मौखिक रूप से प्राप्त करता है। आप इसका प्रयोग सी. पी. यू. की तरह परम्परागत तरीके से की-बोर्ड व एक मॉनिटर को जोड़ने में कर सकते है।      

पर्सनल डिजिटल असिस्टेण्ट (Personal digital assistant)- यह एक हेण्ड हेल्ड (Hand-held) पर्सनल computer है जो टेबलेट पी सी की तरह है तथा इसे एक प्रकार का पामटॉप कम्प्यूटर भी कह सकते है। पी डी ए अब अन्य विशेस्ताओ जैसे - कैमरा, सेलफोन, म्यूजिक प्लेयर इत्यादि के साथ उपलब्ध है। यह एक छोटे से कैलकुलेटर की भाति होता है तथा इसका प्रयोग नॉट लिखने, अड्रेस प्रदर्शित करने, टेलीफोन नम्बर तथा appointments को प्रदर्शित करने में किया जाता है। पी. डी. ए. अब एक पेन के साथ भी उपलब्ध है जिसकी सहायता से यूजर instructions को directly इनपुट कर सकता है प्रयोक्ता की आवस्यकता के अनुसार इसमें अलग से एक छोटा की-बोर्ड तथा माइक्रोफोन टेक्स्ट तथा आवाज को इनपुट करने के उद्देश्य से लगाए जा रहे है 

वर्कस्टेशन (Workstation)- वर्कस्टेशन आकार में माइक्रो computer के सामान होने के बावजूद अधिक शक्तिशाली होते है तथा ये, विशेष रूप से जटिल कार्यो के लिए उपयोग किये जाते है। इस प्रकार के computer माइक्रो कंप्यूटर के सभी लक्षणों को अपने अंदर रखते है। तथा माइक्रो कम्प्यूटर के सामान ही एक समय में एक  यूजर के द्धारा संचालित किये जाते है। इसकी कार्य क्षमता मिनी कम्प्यूटरों के सामान होती है। इसका उपयोग मूलतः वैज्ञानिक इंजीनियरों आदि विशेष्ज्ञो द्धारा होता है, ये माइक्रो कम्प्यूटर से महगें होते है। किन्तु माइक्रो computer के अपार बदलाव तथा इसके बड़े स्तर पर विकास के बाद अब वर्कस्टेशन का प्रचलन कम हुआ है तथा माइक्रो computer के उन्नत उत्पादन ने इसका स्थान लेना प्रारम्भ कर दिया है। अब माइक्रो computer की उन्नत ग्राफिक्स तथा संचार क्षमताओं के साथ बाजार में उपलब्ध हो रहे है। 

मिनी कम्प्यूटर (Mini computer)- ये मध्यम आकर के computer होते है, ये माइक्रो कम्प्यूटर की तुलना में अधिक कार्य क्षमता वाले होतें है। 
मिनी computer की कीमत माइक्रो कम्प्यूटर से अधिक होती है और ये व्यक्तिगत रूप से नहीं ख़रीदे जा सकते। इन्हे छोटी या मध्यम स्तर की कम्पनिया काम में लेती है और इस कम्प्यूटर पर  अधिक व्यक्ति कार्य कर सकता है। 
मिनी computer में एक से अधिक cpu होती है। इसकी मेमोरी और गति माइक्रो कंप्यूटर से अधिक और मेनफ्रेम कम्प्यूटर से कम होती है ये मेनफ्रेम कंप्यूटर से सस्ते होते है। 
मध्यम स्तर की कंपनियों में मिनी कम्प्यूटर ही उपयोगी माने जाते है, हलाकि अनेक व्यक्तिओ के लिए अलग-अलग माइक्रो कम्प्यूटर लगाना भी संभव है। परन्तु यह महगा पड़ता है, प्रति व्यक्ति माइक्रो कंप्यूटर की अपेक्षा मिनी कम्प्यूटर कंपनी में केंद्रीय कम्प्यूटर के रूप में कार्य करता है। और इससे computer के संसाधनों का साँझा हो जाता है इसके अलावा अनेक माइक्रो कम्प्यूटर होने पर उसके रख रखाव व मरम्मत की समस्या बढ़ जाती है। 
एक मध्यम स्तर की कंपनी मिनी computer का उपयोग निम्न कार्यो के लिए कर सकती है। 
  • वित्तीय खातों के रख रखाव के लिए। 
  • कर्मचारियों के वेतन पत्र तैयार करने के लिए। 
  • लागत-विश्लेषण के लिए। 
  • उत्पादन योजना के लिए। 
  • बिक्री-विश्लेषण के लिए। 
मिनी कम्प्यूटरों के अन्य उपयोग यातायात में यात्रिओ के लिए आरक्षण प्रणाली का संचालन और बैंकों में बैंकिंग (Banking) के कार्य है। 
सबसे पहला मिनी computer PDP-8 एक रेफ्रिजरेटर के अकार का 18000 डालर कीमत का था जिसे डिजिटल इक्विपमेंट कार्पोरेशन ने सन 1965 में तैयार किया था। 

मेनफ्रेम कम्प्यूटर (Mainframe computer)- ये कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते है साथ ही इनकी स्टोरेज क्षमता भी अधिक होती है इसमें अधिक मात्रा में डाटा पर तीव्रता से प्रोसेस करने की क्षमता होती है। इसमें अधिक मात्रा डाटा पर तीव्रता से प्रोसेस करने की क्षमता होती है इसलिए इसका उपयोग बड़ी कम्पनिया, बैंक तथा सरकारी विभाग एक centralised computer system के रूप में कार्य करते है। ये चौबीसो घंटे कार्य कर सकते है और इन पर सैकड़ो users एक साथ काम करते है। 
मेनफ्रेम कंप्यूटर को एक Network या माइक्रो कंप्यूटर से परस्पर जोड़ा जा सकता है। ज्यादातर कम्पनियां मेनफ्रेम computer का उपयोग निम्न कार्यो के लिए करती है। 
  • उपभोक्ता द्धारा खरीद का ब्यौरा रखने के लिए। 
  • भुगतानों का ब्यौरा रखना। 
  • बिलो भेजना रखना। 
  • नोटिस भेजने के लिए। 
  • कर्मचारियों के भुगतान के लिए। 
  • tax के विस्तृत ब्यौरा के लिए। 
मेन फ्रेम कम्प्यूटरों के कुछ उदाहरण - IBM 4381, ICL 39 Series और CDC Cyber इत्यादि। 

सुपर कम्प्यूटर (Super computer)- कम्प्यूटर के सभी श्रेणियों में सबसे बड़े, सबसे अधिक स्टोरेज क्षमता वाले और सबसे गतिशील होते होते है। इसके प्रत्येक CPU समान्तर क्रम में कार्य करते है। इस क्रिया को समान्तर प्रक्रिया (parallel processing) कहते है। 

एक CPU द्धारा डाटा और प्रोग्राम एक स्ट्रीम में एक्जीक्यूट करने की पारम्परिक विचारधारा "वान न्यूमान सिद्धांत" (Von neumann concept) कहलाती है। लेकिन सुपर कम्प्यूटर "नॉन-वान न्यूमान सिद्धांत" (Non-von neumann concept) के आधार पर तैयार किया जाता है। सुपर computer में अनेक ALU व CPU के भाग होते है। प्रत्येक ए एल यू एक निश्चित क्रिया के लिए होता है और सभी ए एल यू एक समान्तर प्रक्रिया करते है। 

सुपर कंप्यूटर का उपयोग -
  • प्रयोगशाला में शोध व खोज के लिए। 
  • आंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए। 
  • मौसम की भविष्य वाणी। 
  • animation चित्र के निर्माण में। 
ऊपर लिखे सभी कार्य व गणना प्रक्रिया जटिल व उच्च कोटि की शुद्धता  वाली होती है इन्हे सुपर computer ही कर सकता है, ये सबसे मंहगें कम्प्यूटरों में से होते है। इनकी कीमत अरबों रूपये में होती है, भारत में C-DAC द्धारा "PARAM" नामक सुपर computer विकशित किया गया है। इसका विकशित रूप 'परम - 10000 भी तैयार कर लिया गया है। 
सुपर कम्प्यूटर के उदाहरण - CRAY-2, XMP-24, NEC-500 इत्यादि। 

इम्बेड कम्प्यूटर (Embedded Computer)- यह एक विशेष उदेस्य वाली computer सिस्टम है, जिसे dedicated function को संपन्न करने के लिए डिजाइन किया जाता है। एक सामान्य उदेश्य वाली कम्प्यूटर जैसे पर्सनल कम्प्यूटर से भिन्न एक एम्बेडेड कम्प्यूटर सिस्टम एक या कुछ पूर्व निर्धारित (pre-defined) कार्यो को संपन्न करती है जिसकी देखा जाए तो बहुत ही जरुरी आवश्यकताएँ होती है तथा प्रायः ऐसे विशेष कार्य वाले हार्डवेयर एवं मेकेनिकल पार्ट को सम्मिलित करता है जो प्रायः सामान्य उदेस्य वाली computer में नहीं पाए जाते है। यघपि तह सिस्टम विसिस्ट कार्यो के लिए निर्धारित है, तथापि डिज़ाइन इंजीनियर इस उत्पाद के आकार तथा लागत के घटने से इसके प्रति आशान्वित है। आर्थिक दृस्टि से फायदेमंद होने से इम्बेडेड सिस्टम देखा जाए तो बड़े पैमाने पर उत्पादित हो रहे है। 
भौतिक रूप से एम्बेडेड computer पोर्टेबल कम्प्यूटरों, जैसे डिजिटल घड़ियों व MP3 प्लेयर से लेकर बड़े स्टेशनरी इंस्टालेशन traffic light फैक्ट्री कण्ट्रोलर अथवा परमाणु सक्ति इकाइयों तक को नियंत्रित करने में पाया जा सकता है। जटिलता के मामले में इम्बेडेड सिस्टम साधारण से एक माइक्रो कंट्रोलर चिप से लेकर मल्टीपल यूनिट, पेरिफेरल्स तथा नेटवर्क जो एक बड़े चेचिस या आवरण जैसे काम्प्लेक्स सिस्टम में भी हो सकते है। मोबाईल फोन अथवा हेण्ड-हेल्ड कम्प्यूटर कुछ एलिमेंट इम्बेडेड सिस्टम के साथ सेयर करते है जैसे आपरेटिंग सिस्टम अथवा माइक्रोप्रोसेसर्स जो उन्हें पावर देते है, परन्तु ये वस्तुतः एम्बेडेड सिस्टम नहीं होते है क्योकि इन्हे सामान्य उद्देश्यी होने के साथ विभिन्न application तो तथा पेरिफेरल्स को संयोजित होने की अनुमति प्रदान करती है। 

कम्प्यूटर के मुख्य प्रयोग (Fundamental user of computer)- यह तो सभी जानते है की computer आधुनिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग बन गया है आज बच्चा-बच्चा इसके बारे में जानता है। इसके बिना देश की जनगड़ना नहीं हो सकती वही दूसरी और भारतीय रेलवे इसके बिना अपनी आरक्षण-प्रणाली को प्रभावसाली नहीं बना सकती। विश्व विद्दालय एवं शिक्षण संस्थान computer की सहायता से हजारो अंक तालिकाएं बहुत ही कम समय में तैयार कर सकती है। 

कई संगठन अपने कार्यालयों की प्रणाली का संचालन computer के द्धारा ही करते है। बैंको में किये जाने वाले लेन दें को कम्प्यूटर ही आज सुचारु रूप से कर रहा है। साथ ही प्रभावशाली टेलीफोन व्यवस्था सम्पूर्ण रूप से कम्प्यूटर कृत हो गयी है। हम घर में बैठकर TV में जो प्रोग्राम देखते है। वे सभी आज कम्प्यूटर द्धारा ही सम्पादित किये जाते है और उसे हम तक पहुंचाने का काम भी कम्प्यूटर ही करता है उपग्रह की सहायता से। भारत एक विकाशसील देश है और आप जानते है की इसकी प्रमुख समस्या बेरोजगारी है, इसे दूर करने के लिए भी computer ने रोजगार के नए द्धार खोले है। आज भारत दुनिया में सॉफ्टवेयर के निर्यातकों में से एक है, इसलिए कह सकते है की इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है। 

घर में कम्प्यूटर के कार्य (Computers in household use)- सन उन्नीस सौ सत्तर में जब माइक्रो कम्प्यूटर का विकास हुआ तो computer को घर में लाने की केवल कल्पना ही की जा सकती थी, पर आज यह कल्पना साकार हो गयी है। माइक्रो कम्प्यूटर के विभिन्न छोटे आकार के और सुविधा जनक मॉडल हम अपने व्यक्तिगत कार्यो के लिए घरों में स्थापित कर सकते है। इसका आकार इतना है की एक सुटकेश में इसे रखा जा सकता है आइये घर में इसके प्रयोग को जानते है।
  • कुटीर उद्योग में - आजकल computer ने सुचना को विक्रय योग्य एवं उपयोगी वस्तु बना दिया है जिससे घरों में चलाये जा सकने वाले व्यवसायों का उदय हुआ है DTP (Desk top publishing) एक एसा व्यवसाय है जिसमे कम्प्यूटर से प्रकाशन के कार्य घर में ही किये जा सकते है। डिश एंटीना लगाकर उपग्रह में संपर्क स्थापित करने वाला केंद्र हम computer की मदद से घर पर ही बना सकते है। 
  • रसोईघर में प्रयोग (in kitchen)- इलेक्ट्रानिक प्रोसेसर और मेमोरी का रसोई सम्बंधित यंत्रो जैसे माइक्रोवेव आवन (Microwave oven) में प्रयोग होता है। 
  • कम्प्यूटर कृत घर (Computerized homes)- आजकल घरों को कम्प्यूटर नियंत्रित बनाया जा रहा है। कम्प्यूटर ही मेहमानो की पहचान व उनका स्वागत करते है। lawn में पानी देने के कार्य से लेकर घर में अनुपस्थिति में घर के तापमान को नियंत्रित करने का कार्य भी करती है। 
  • कम्प्यूटर कृत कार (Computerized cars)- आज के कारों में computer के द्धारा सभी नियंत्रण कार्य जैसे कार मालिक की आवाज पहचान कर दरवाजा खोलना, पेट्रोल मात्रा की चेतावनी, कार की सतह को इक्षा के अनुसार परिवर्तित करना, सड़क व शहर का मानचित्र उपलब्ध कराना आदि संचालित होते है। 
  • घर में खरीददारी व बैंकिंग (Home shopping and banking)-इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर (EFT) सिस्टम बैंक की एक ऐसी सुविधा है। जिसमे हम बैंकों यातायात एजेंसियों और दुकानों से रुपया का लेनदेन घर में लगे computer की सहायता से कर सकते है। घर में लगा computer टेलीफोन लाइन से जुड़ा रहता है इसका संपर्क INTERNET से होता है। 
  • व्यक्तिगत रोबोट नौकर (Personal robot servants)- रोबोट को केवल फैक्ट्रियों में खतरनाक कार्य करने वाला ही न समझे इसे व्यक्तिगत कार्य के लिए नौकर भी बनाया जा सकता है रोबोट computer द्धारा संचालित एक यांत्रिक मानव (computerized machine man होता है। 

शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग (Computers in education)- computer का शिक्षा में उपयोग बढ़ाने के लिए सबसे पहला प्रयास जान केमेनी (John kemeny) ने 1960 के दशक में किया जब उन्होंने बेशिक कम्प्यूटर भाषा का विकाश किया यह भाषा जल्द ही डार्ट माउथ महाविद्यालय के विद्यार्थीयों के जीवन का अंग बन गई। 
आज computer और शिक्षा एक दूसरे के पूरक है। शिक्षा में कम्प्यूटर के उपयोग निम्नलिखित है। 
  • कम्प्यूटर सीखना (learning about computer)- कम्प्यूटर आज जन साधारण का यंत्र है, इसलिए यह अब एक उपकरण मात्र से एक सम्पूर्ण विद्या में परिवर्तित हो गया है। हर व्यक्ति कम्प्यूटर जानने को आतुर है। फलस्वरूप विश्व विद्यालय नए नए ट्रेड्स एवं पाठ्यक्रमों को लागू कर रहे है। कम्प्यूटर विज्ञान, सुचना प्रौद्योगिकी, Computerized information system सब कुछ computer के सिखने से ही सम्बंधित है। छोटे गांव में भी शिक्षा देने के लिए लगातार संस्थाए खुल रही है। 
  • कम्प्यूटर एक शिक्षक के रूप में (Computer as a teacher)- कम्प्यूटर असिस्टेंट इंस्ट्रक्सन कम्प्यूटर का एक सॉफ्टवेयर है जो computer को एक शिक्षक का रूप देता है। उदाहरण के लिए माध्यमिक स्तर का विद्यार्थी कम्प्यूटर में चल रहे सी. ए. आई. में बीजगणित का अध्ययन करें तो CAI विद्यार्थी को कम्प्यूटर की स्क्रीन पर बीजगणित का एक सवाल हल करने के लिए देगा। अगर इसका सही हल दिया जाए तो कंप्यूटर अगला सवाल देता है इसी तरह बारी-बारी अगला सवाल देता जाता है। और अंत में आपके प्राप्तांक को mark sheet में दे देता है। 
  • कम्प्यूटर मैनेज्ड इंस्ट्रक्शन (Computer managed instruction)- जिसे संक्षेप में CMI कहा जाता है एक और सॉफ्टवेयर है जो कम्प्यूटर पर पुस्तक पढ़ने की सुविधा देता है। इसके साथ ही विध्यार्थी इसकी सहायता से अपने लेख को परस्पर जुड़े connected कम्प्यूटरों में भेज सकते है। इस प्रकार विषय वस्तु एक कम्प्यूटर में सिमित नहीं रहती। इसलिए CMI को बड़े स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक विश्वविध्यालय (Electronic university) भी कहते है। 
  • समस्या समाधान (problem solving)- पढाई में जो कठिनाई होती है computer उसको सरल कर देता है। कम्प्यूटर एक समस्या के हल के लिए अनेक व्यक्तियों के तर्कों का उपयोग तेज़ी लेता है जिससे समस्या शीघ्रता से हल हो जाता है। 
  • प्रशिक्षण तथा परीक्षण में कम्प्यूटर (Computer in training and examinations)- आज प्रतिष्ठित संगठनों द्धारा उनके उत्पादों पर प्रशिक्षित किये जा सकते है। आप ऑनलाइन इसके द्धारा लिए जाने वाली परीक्षाओ में बैठ सकते है और सफल होने पर डिग्री भी प्राप्त कर सकतें है। MIR एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो बैंकिंग तथा अन्य वस्तुनिस्ट परीक्षाओ की उत्तर पुस्तिकाओ की अतभुत गति और सुधता के साथ जांचने में सहायक होती है।  

मनोरंजन में कम्प्यूटर (Computers in entertainment)- कम्प्यूटर आज सबसे अधिक मनोरंजन करने वाले यंत्रो में से एक है यदि पढ़े लिखे लोगों से वोटिंग करवाई जाए तो सभी लोग कम्प्यूटर को मनोरंजन के साधन ही पे ज्यादा वोट देंगे। क्योकि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से computer आज एक बड़ा मनोरजनकर्ता बन गया है उदाहरण के लिए youtube में चले जाइये आपको हजारो प्रकार के मनोरंजन मिल जाएंगे। 
  • खेल (Games)- कम्प्यूटर में हम मनोरंजन और बौद्धिक क्षमता बढ़ाने वाले खेलों का आनन्द ले सकते है। 
  • फिल्मे (movies)- फिल्म उध्योग में कम्प्यूटर से चलचित्र में अनेक फोटोग्राफिक प्रभाव, संगीत प्रभाव, एक्शन प्रभाव आदि को उन्नत किया जाता है। कम्प्यूटर में मल्टीमीडिया तकनीक की सुविधा से काल्पनिक दृश्य भी जीवंत से लगते है। उदाहरण के लिए फिल्म 'जुरासिक पार्क' (jurassik park) जिसमे एक विलुप्त प्रजाति के जिव डायनासोर का फिल्मांकन कम्प्यूटर और मल्टीमीडिया के कुछ सॉफ्टवेयर जैसे - 3D स्टूडियो मैक्स आदि की मदद से किया गया था।
  • संगीत (Music)- संगीतकार (musicians) एक कम्प्यूटर जिसे इलेक्ट्रॉनिक सिंथेसाइज़र (Electronic synthesizer) कहते है, को काम में लेते है। यह आवाज रिकॉर्ड करता है व पुरानी धुनों को मेमोरी मेसे देता है। computer की सहायता से विभिन वाध्य यंत्रों की धुनें कृतिम रूप से तैयार की जा सकती है। 
  • कला (Art)- कम्प्यूटर के द्धारा हम आकृतियों को विभिन्न रूप, आकार रंग आदि दे सकते है। चित्र कला जैसे कार्य करने वाले अनेक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम computer में उपलब्ध होते है। फोटोशॉप (photo shop) इसी प्रकार का एक सॉफ्टवेयर है।  

वैज्ञानिक शोध में कम्प्यूटर (Computers in scientific research)- कम्प्यूटर का मौसम की भविष्य वाणी (Weather forecasting) में प्रमुख उपयोग है। मौषम का अनुमान लगाने के लिए, वर्तमान मौषम की स्थिति के डाटा कम्प्यूटर में input किये जाते है, जिनकी भूतकाल के मौसम की स्थितियों में computer तुलना करता है। मौसम की भविष्यवाणी की प्रक्रिया चौबीसो घंटे चलती है। इसमें डाटा की संख्या अधिक होती है। इसलिए इस कार्य के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुपर computer का उपयोग किया जाता है।

अंतरिक्ष-यात्रियों को अंतरिक्ष यानों में सवार कराके कम्प्यूटर की सहायता से अंतरिक्ष यात्रा करवाते है, इस कार्य जटिल खगोलीय गणनाये होती है और खगोलीय पिंडों की दूरियों का आकलन आदि computer की शुद्धता (Accuracy) से कर सकता है। simulation एक ऐसी तकनीक है जिसमे कम्प्यूटर किसी वास्तविक वस्तु का वर्चुअल मॉडल (virtual models) बना देता है और उसका परीक्षण किया जाता है। इस प्रकार भवनों, कारों, वायुयानों, प्रक्षेपास्त्रों, अंतरिक्षयानो के मॉडल simulation तकनीक से बनाकर उसका परिक्षण किया जाता है। simulation की यह प्रक्रिया कम्प्यूटर एडेड डिजाइन भी कहलाती है। 

कम्प्यूटर simulation (computer simulation)- कम्प्यूटर simulation वास्तविक तथा सैद्धांतिक भौतिक प्रणाली (theoretical physical system) को डिजाइन करने की एक कला है, simulation के माध्यम से किसी डिजिटल कम्प्यूटर पर मॉडलों का एक्जिक्युशन किया जा सकता है इसके बाद इसमें आउटपुट का विश्लेषण भी किया जा सकता है। simulation करते हुए सिखने के सिद्धांत को मूर्त रूप देता है। इसका प्रयोग एक गतिविधि होता है जो उतना ही प्राकृतिक है जितना कोई बच्चा किसी भूमिका को निभाता है। बच्चे अपने चारो और की दुनिया को जैसे अन्य लोगों जानवरों तथा वस्तुओं के साथ interaction सिमुलेशन के माध्यम से समझते है। 
इसका उपयोग प्रायः सैनिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने में होता है। यह आमतौर पर तब होता है जब यह निषेधात्मक रूप तथा प्रशिक्षु के लिए वास्तविक यंत्रो का प्रयोग करवाना अत्यंत घातक हो। एसे स्थिति में वे एक सुरक्षित काल्पनिक वातावरण के बहुमूल्य पाठों को सीखते है इसका प्रायः एक और लाभ यह है की इसमें प्रशिक्षण के दौरान होने वाली गलतियों से किसी प्रकार का नुकशान नहीं होता है। और इसमें आप सिखने के भाव से गलतिया करने की छूट पातें है। 


चिकित्सा के क्षेत्र में कम्प्यूटर (Computer in medical treatment)- कम्प्यूटर हमारे दैनिक जीवन में हमे स्वस्थ बनाने के लिए निरन्तर प्रयाश में लगा हुआ है। आइये जानते है किस प्रकार से -

  • कम्प्यूटर असिस्टेंट डाइग्नोसिस (Computer assisted Diagnosis)- यह एक ऐसी सुविधा है जिसमे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर चिकित्सको को रोगियों के परीक्षण करने में मदद करता है। रोगी के लक्षणों को कम्प्यूटर में इनपुट किया जाता है और सॉफ्टवेयर इस रोगी के लक्षणों की तुलना पिछले रोगियों से कर के रिपोर्ट की तुलना कर रोग का पता लगाता है।
  • कम्प्यूटर टोमोग्राफी (Computer tomography)- यह एक ऐसी सुविधा है जिसमे कैट स्केनिंग (CAT Scanning की जाती है।  जिसमे X-Ray हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मिलकर रोगी के आंतरिक अंगो का त्रिविमीय (Three dimensional) चित्र प्रस्तुत करते है। चिकित्सक इस चित्र से रोगी के रोग को अधिक सुधता से जांच करते है। 
  • कम्प्युटराइज़्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (Computerized life-support system)- यह नर्सिंग सहायता है जिसमे गंभीर अवस्था में रोगी का लगातार monitor किया जाता है और रोगी की हृदयगति तापमान व रक्तचाप में प्राणघात बदलाव को अलार्म से सूचित किया जाता है यह सिस्टम computer द्धारा ही संचालित किया जाता है। आजकल computer का उपयोग विकलांगों के लिए भी बढ़ चूका है। ऐसे-ऐसे कम्प्यूटर तैयार किये गए है जो मानव की आवाज से निर्देश प्राप्त करते है। यहां तक की नेत्रहीनो के लिए भी कम्प्यूटर तैयार कर लिए गए है।        

सुचना प्रौद्योगिकी में कम्प्यूटर (Computer in information technology)- कम्प्यूटर के लगातार विस्तार से एक नई technology का जन्म हुआ है जिसे information technology कहते है। आइए इसके उपयोगों को जानते है।
  • इन्टरनेट (Internet)- इन्टरनेट computer का अन्तर्राष्ट्रीय नेटवर्क (Network) है दुनिया भर के कम्प्यूटर नेटवर्क इन्टरनेट से जुड़े हुए होते है। और हम कहीं भी घर बैठे अपने कम्प्यूटर में जरुरी जानकारी प्राप्त कर सकते है जिसमे - राजनीति, खेल, संगीत, सिनेमा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, विज्ञान, कला, संस्कृति आदि लगभग सभी विषयों पर जानकारी internet पर उपलब्ध है। अपना पसंद की विषय चुनने के लिए सर्च इंजिन सॉफ्टवेयर internet पर होते है। उदाहरण के लिए yahoo, google ये कुछ सर्च इंजिन है, यह सर्च इंजिन website का पता लगाते है लगभग सभी website की सुरुवात के तीन अक्षर www से होती है जिसका अर्थ World wide web होता है, जैसे www.informationunbox.com.
  • ई-बिजनेस (e-Business)- कम्प्यूटर में आपरेशन्स इलेक्ट्रॉनिक विधि से होते है, अतः आधुनिक बिजनेस जो computer और इन्टरनेट के सहयोग से किया जाता है 'ई-बिजनेस' या इलेक्ट्रॉनिक बिजनेस कहलाता है यह बिजनेस ई-कामर्स के अंतर्गत आती है। 

आइये कुछ computer फैक्ट्स पर नजर डालते है -

  • कंप्यूटर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक यंत्र (machine) है जो अंकगणित और तार्किक क्रिया-कलापों को साथ-साथ संपन्न करती है। 
  • कंप्यूटर की क्षमताओं में गति, सुधता, स्वचालन, सार्वभौमिकता, उच्च संग्रहण क्षमता, कर्मठता और विश्वनीयता का समावेश है। 
  • कंप्यूटर की कमियों में सामान्य बोध और आत्मरक्षा की कमी है। 
  • इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर एक ऐसी सुविधा है जिससे आप घर बैठे बैंकों से रूपये का लेन-देन कर सकते है। 
  • कंप्यूटर के इतिहास में उनीसवीं शताब्दी का प्रारंभिक समय स्वर्णिम युग माना जाता है। 
  • चार्ल्स बैवेज ने सन 1822 में एक मशीन "डिफरेन्स इंजिन" का निर्माण किया। 
  • डिफरेन्स इंजिन को बाद में परिवर्ती कर एनालिटिकल इंजिन के रूप में नया नाम दिया गया। 
  • सन 1896 में हॉलेरिथ ने पंचकार्ड बनाने एक कम्पनी टेबुलेटिंग मशीन कंपनी स्थापित की। 
  • एबीसी का तात्पर्य एटानासोफ बेरी computer से है। 

अंत में देखते है की आखिर computer साक्षरता की आवस्यकता क्यों -

कम्प्यूटर को जानना आवश्यक क्यों है ? क्या यह सिर्फ एक उद्योग को स्थापित करने की कोसिस है। या फिर कंप्यूटर आज वाकई इतना महत्वपूर्ण बन गया है की इसको भली-भाति जानना आवश्यक है। इससे पहले की आप इससे इसका जवाब ढूंढे ऊपर लिखे आर्टिकल पर गौर करें और अपने चारो तरफ computer से होने वाले कार्यो और उसके अनुप्रयोगों पे नजर डालें आपको जवाब मिल जाएगा, फिर आप ही बताइये की आपके लिए computer साक्षर होना आवश्यक है की नहीं 
दोस्तों याद रखिये - आपके पास निर्णय लेने लिए केवल एक दिमाग नहीं, बल्कि विश्व के सबसे अच्छे दिमागों का संकलन COMPUTER की सहायता से उपलब्ध होता है। इस तंत्र को Experts system कहते है। 

अंतिम शब्द -

आशा है की आपको हमारा यह लेख कम्प्यूटर क्या है ? computer kya hai. what is a computer. विस्तार से जानें। पसन्द आये, और आपके काम आये, अगर जानकारी अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करें और हमारे Facebook पेज व PinterestInstagram और Twitter को अवश्य लाइक करें। अगर कोई सुझाव हो तो कॉमेंट जरूर करे- धन्यवाद,

इन्हे भी अवश्य पढ़ें : 

Post a Comment