project business marketing complete information in hindi -

प्रोजेक्ट की कल्पना और उसको मूर्त रूप देना एक उद्यमी का कार्य है। इन सब के बाद निर्मित उत्पादन की मार्केटिंग की बात आती है, किसी भी परियोजना की तैयारी की अवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है क्योकि यह ही किसी सफल परियोजना का आधार होती है | 


इस अवस्था में ही प्रोजेक्ट के विषय वस्तु को परिभासित किया जाता है व जरुरी अनुमतियाँ ली जाती है और कम्पनी मास्टर प्लान, परियोजना प्लान बनाया जाता है | एक उत्तम परियोजना तैयारी ही न्यूनतम संभावित समय और निवेश को सुनिश्चित करती है प्रोजेक्ट तैयारी की अवस्था में समस्त सम्बंधित पक्ष का आकलन किया जाता है फिर marketing की योजना बनाई जाती है। 

 

business marketing in hindi
business marketing plan in hindi
              


विभन्न ट्रेडों में व्यापार के प्रकार (types of business in different trades)

व्यापार के निम्न प्रकार व रूप -


  • सोल ट्रेडर - यह व्यापार का प्राचीन सरलतम और सबसे सामान्य रूप है, इस व्यापार में आप स्वामी के रूप में कार्य करते है, यह छोटी दुकानों और व्यवसायो सम्बन्धी सामान्य प्रकार है, इस व्यापार को आप अपनी स्वय की पूंजी लगाकर आरम्भ करते है।
  • पार्टनरशिप - इस व्यापार में दो या दो से अधिक लोगो की पूंजी लगी होती है, जितने लोग इस व्यापार से जुड़े है, उनके लाभों, निर्णयों सम्बन्धी फैसले साथ में लिए जाते है। 
  • कम्पनी - यह भी व्यापार का एक प्रकार है | इसके लिए उपुक्त नाम ज्वाइन स्टॉक कम्पनी है जो अनेक लोगो द्धारा निवेश की गयी पूंजी एक साथ ज्वाइंट स्टॉक के रूप में एकत्र कर निर्मित की जाती है | इसमें प्रत्येक व्यापार का अंशधारक होता है तथा प्रत्येक अंश के रूप में लाभ की अपेक्षा भी रखता है | ये दो प्रकार के होती है -
  • प्राइवेट लिमिटेड कंपनी - अधिकतर लघु व्यापार प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी ही है जिसमे अंशधारक उदहारण रूप में पारिवारिक सदस्य ही होती है। 
  • पब्लिक लिमिटेड कम्पनी - यह सामान्यः वृहद् ढांचे वाले कंपनियों के लिए सुरक्षित है, इसके लिए अन्य चीजों के अलावा एक से अधिक डायरेक्टरों और कंपनी हॉउस प्रदत प्रमाण-पत्र आवश्यक होता है एसी कम्पनिया अपनी अंगो का स्टॉक मार्केट की सहायता से विक्रय कर सकती है, अतः उन्हें कोई भी क्रय करने में सक्षम होता है, यह पूंजी एकत्रित करने का एक सरल व सुरक्षित माध्यम है, कम्पनी हाउस में एसी कम्पनी सम्बंधित समस्त विवरण होता है। 

फ्रेंचाइजी - व्यापार के इस प्रकार में अन्य सफल कंपनियों के सफल बिज़नेस मॉडल के अनुरूप अपना प्रतिष्ठान प्रारम्भ किया जाता है | इसमें फ्रेंचाइजी तथा कंपनी का प्रचलित प्रसिद्ध नाम खरीदने की अनिवार्यता होती है, इसके एवज में कंपनी का इंटेंट उपभोक्ता आधार उपलब्ध होता है फ्रेंचाइजी एक निश्चित अवधि के लिए, नियमो के अनुसार दी जाती है, यह छेत्र विशेष के लिए दी जाती है | इसके लिए फ्रेंचाइजी को ट्रेडमार्क के प्रयोग के लिए रायल्टी दी जाती है, और प्रशिक्षण व सुझाव के लिए शुल्क दिया जाता है, इसके लिए सतर्कता आवश्यक है। 

कर्मचारी सहकारी समिति - इसमें प्रबंध निदेशक से सहायक तक सभी व्यक्ति सामान रूप से महत्वपूर्ण है, इसमें समस्त निर्णय लोकतान्त्रिक तरिके से लिए जाते है और लाभांश का वितरण एक सामान तरिके से किया जाता है अथवा इसका पुनः व्यापार में निवेश कर दिया जाता है। 

सीमित दायित्व सांझेदारी - यह लगभग प्रारम्भ व्यापार का नया रूप है, ये प्रोफेसनल सांझेदारियो के आलोक में की जाती है, इनके गठन के मूल में सदस्यों के व्यक्तिक दायित्वों को सिमित करना होता है, यदि व्यापार में कुछ गलत हो रहा हो। 

व्यापार में कौशल का महत्व (importance of skill in business)

किसी व्यापार की सफलता उद्यमी तथा कारीगरों के कौशल पर निर्भर करती है, सफल उद्यमी, अपने प्रबंधको, कार्मिको एवं कारीगरों को अधिक वेतन एवं सुविधाएं प्रदान करते है, जिससे की कारीगरों का कौशल बना रहे और व्यापार की प्रतिष्ठा स्थापित रहे | व्यापार के सफल सञ्चालन के लिए उद्यमी या व्यापारी को विज्ञान, कला, और तकनीक का पूरा ज्ञान होना चाहिए | यदि वह स्वयं कीसी कला में कौसल रखता है तो वह अपने कारीगरों को गुणवत्ता वाली सामग्री तैयार करने के लिए प्रेरित कर सकता है, कौसल को निम्न तीन वर्गो में रखा जा सकता है। 

  1. तकनिकी कौशल - यह कौशल विद्यमान तकनिकी संस्थानों में अध्ययन करके प्राप्त किया जा सकता है। 
  2. मानवीय सम्बन्धो से सम्बंधित कौशल - यह कौशल उद्यमी को उनके व्यापारिक संपर्क में आने वाले लोगो के साथ व्यवहार कुशल होने में सहायता करता है, परिणाम स्वरूप  वह संपर्क में आने वाले लोगो से व्यापार के हित में कार्य कराने में सफल होता है। 
  3. वैचारिक कौशल - इसके द्धारा प्रबंधक भविष्य में आने वाली समस्याओ का आकलन करता है, तथा अनुरूपतः योजना तैयार कर अपने व्यापार की दक्षता का स्तर बनाये रखने में सफल रहता है उद्यमी को स्वयं में उपरोक्त कौशलों को विकसित करना चाहिए, और कारीगरों को अपने कौशल का विकास कर अपना महत्व बनाये रखना चाहिए | उद्यमी या प्रबंधक की सफलता या असफलता बहुत कुछ उसके द्वारा लिए गए निर्णयों पर निर्भर करती है व्यापार की सफलता के लिए निर्णय के मूल एवं महत्वपूर्ण तत्व निम्नलिखित है -
  • लक्ष्य निर्धारण। 
  • विकल्पों का चयन। 
  • लक्ष्यों के अनुरूप कार्य निश्चित करना। 
  • तार्किक विचार एवं कारण। 
  • परिस्तिथियो का आकलन एवं मूल्यांकन। 

उपरोक्त मूल तत्व पर विचार करते हुए किसी एक व्यक्ति द्धारा लिया गया निर्णय व्यक्तिगत निर्णय कहलाता है और यदि कोई निर्णय किसी समूह जैसे - निदेशक मंडल द्वारा लिया जाता है तो यह सामूहिक निर्णय कहलाता है। 

निर्णय - किसी भी महत्वपूर्ण विषय पर निर्णय लेते समय निम्न बातो को ध्यान में रखना चाहिए | 
  • समय एवं अनुभव 
  • बुद्धिमता 
  • स्पस्टता 
  • अटलता और निडरता 
समस्या का समाधान - किसी भी समस्या का समाधान निर्णय लेने की कला पर निर्भर करता है, एक उद्यमी या प्रबंधक को कई समस्याओ के समाधान खोजने पड़ते है। अतः उचित समाधान के लिए उसे निम्न बातो को ध्यान में रखना चाहिए। 
 
  • समस्या का वीसलेसण कर समाधान निकालना। 
  • विपरीत परिस्तिथियों में धैर्य व साहस बनाये रखना। 
  • दूरदर्शिता अपनाना। 
  • त्वरित समयानुकूल और बुद्धिमता पूर्ण निर्णय करना। 
  • समस्या समाधान के लिए कार्य-प्रणाली नियत करना।  
ऊपर सब्दो से पता चल गया होगा की व्यापार में कौसलता का विशेष महत्व है 

नई परियोजना (व्यापार) आरम्भ करने की प्रक्रिया के चरण (stages in the process of starting a new project (business)

आप जब नई परियोजना (व्यापार) आरम्भ करते है तब आप अपने विचारो को विविध चरणों में विकसित करते है, सफलता के लिए व्यापार की उचित प्रक्रिया का उपयोग करके प्रारम्भ करना अनिवार्य है | किसी व्यापार की आयोजना (planing) क्रमबद्ध तरिके से करना एक ठोस व्यापार की नीव विकसित करता है। 

प्राथमिक शोध - व्यापार आयोजना आरम्भ करने के पूर्व पहले ये निर्णय ले लेनी चाहिए की आप किस प्रकार का व्यापार करने के इक्छुक है, फिर उस हिसाब से सूचि तैयार कीजिये की कौन सा प्लानिंग फायदेमंद साबित होगा, पुनः विचार कीजिये की क्या इस व्यापार की मांग है, इस व्यापार को आरम्भ करने में क्या अड़चने आएगी, किस लेबल का कॉम्पटीसन रहेगा, आप हर तरह से इसके लिए तैयार तो है | 

व्यापार आयोजन (business plan in hindi)- किसी भी व्यापार की आरंभिक चरणों में एक व्यापार आयोजना भी जरुरी है, आपकी व्यापार आयोजना यह रेखांकित करती है की आप, क्या व्यापार आरम्भ करेंगे, आरम्भ में कितनी धन की आवस्यकता होगी, आपको व्यापार को चलाने में किस प्रकार की सुविधाओं की आवस्यकता होगी आपको कितने स्टाफ की जरूरत होगी और सुरु के 3 साल राजस्व प्रोजेक्शन का आकलन आदि | आपकी व्यापार आयोजना आपकी व्यापार का ब्लूप्रिंट होता है की आप कैसे व्यापार को बनाना चाहते है | यह आपको मार्गदर्शन प्रदान करती है, की आपको कितने निवेश की आवश्य्कता है, इससे आप निवेशको के समक्ष रखकर उसमे रूचि रखने वालो को निवेश के लिए प्रोत्साहित कर सकते है | 

वित्तीय प्रबंधन ( financial management)- व्यापार आरम्भ करने के पूर्व आपको अपने वित्तीय प्रबंधन के प्रति आस्वस्त होना होगा | आप अपनी आरम्भिक पूंजी की आवस्य्क्ता पूर्ति के लिए व्यापार आयोजना का अनुसरण करे निवेशको से आग्रह करने के पूर्व यह सुनिश्चित करे की आप अपने स्तर में कितना नगद निवेश कर सकते है, आप अपने घर से मैनेज करके वित्तीय सांझेदारी आदि तरीके अपना सकते है | 

पब्लिक लिमिटेड कम्पनी (public limited company)
पब्लिक लिमिटेड कम्पनी plc का लघुरूप उन्नीस सौ चौहत्तर में किया गया था, यह वह कम्पनी है जिसकी प्रतिभूतियां एक स्टॉक एक्सचेंज पर विक्रय हेतु रहती है, जिसकी जिसको कोई भी खरीद या बेच सकता है, पब्लिक कम्पनिया कड़ाई से नियमित होती है और कानून अपनी पूर्ण एवं वास्तविक वित्तीय स्थिति का प्रकाशन उसके लिए जरूरी है जिससे की निवेशक अस की वास्तविक या सत्य कीमत व मूल्य से अवगत हो सके | एक पब्लिक लिमिटेड कम्पनी जनता को अंस विकृत कर कंपनी के विस्तार एवं प्रचालनों को जारी रखने के लिए प्रभावी रूप से धन एकत्रित करने के योग्य होती है | निवेशको को सिमित दाइत्व प्रदत करने से आशय है की पब्लिक लिमिटेड कंपनी के विविध और ऋण दायित्व किसी भी दसा में हस्तांतरित नहीं किये जा सकते | 

लाभ (advantages)- इसका लाभ यह है की इसमें सिमित दायित्व होती है, पब्लिक कम्पनी वृद्धि के लिए प्रतिभूतियों के रूप में इनक्विटी आमंत्रित कर सकती इन प्रतिभूतियों का का उपयोग पूंजी में वृद्धि करने के लिए या फिर व्यापार के इंस्फ्राट्रक्टर में वृद्धि करने के लिए किया जा सकता है | साथ ही पब्लिक कम्पनिया जन सम्बन्ध कायम करने में सक्षम हो सकती है। 

हानिया (disadvantages)- पब्लिक एवं प्राइवेट कंपनियों के मध्य मुख्य अन्तरो में से एक स्वामित्व को लेकर यह है की बाद वाली का व्यापार सम्बन्धी सुचना को प्रसारित करने सम्बंधित अधिक दबाव या विधिक दाइत्व का ना होना है | पब्लिक कम्पनियो के लिए यह कानून जरुरी है की वे कम्प्रीहेन्सिव कर प्रपत्रों को जमा करे वार्षिक वृतीय लाभ हानि वितरण के साथ। 


बाजार सर्वेक्षण (market survey)- वस्तुओ के स्तान्तरण और विक्रय सम्बन्धी सभी समस्याओ का एकत्रीकरण, अभिलेख एवं विस्लेसण करना तथा विक्री के पश्चात उपभोक्ताओं को उत्पादको द्वारा दी जाने वाली सेवाएं बाज़ार सर्वेक्षण कहलाती है | 

उद्देश्य - बाज़ार से निम्न सुचना सुचना एकत्रित करने के लिए सर्वेक्षण किये जाते है -
  • उस उपभोक्ता वर्ग के बारे में जानकारी प्राप्त करना जो उत्पादन का उपभोग करेगा | 
  • बाजार में प्रस्तुत किसी नए उत्पादन के प्रति उपभोक्ता की प्रतिक्रिया जानना | 
  • संभावित विक्री का मूल्यांकन करना | 
  • बाज़ार में उपलब्ध अन्य उत्पादनो के बारे में जानकारी प्राप्त करना | 

लाभ - उत्पादन मांग के आधार पर अनुकूल उत्पादन निर्धारण में मदद मिलती है। 
उपभोक्ता की रूचि एवं आवस्य्क्ता के अनुसार उत्पादन में परिवर्तन किये जा सकते है। 
इसके द्वारा उत्पादन के विक्री के लिए नए बाज़ार एवं नए उपभोक्ताओं की खोज में अत्यधिक सहायता मिलती है। 

तरीके - निम्न तरीकों द्धारा बाज़ार सर्वेक्षण सम्पन्न किया जाता है -
  • उपभोक्ता द्धारा।  
  • सर्वेक्षण संसथाओ द्धारा।  
  • डीलर्स द्धारा। 
  • विक्रय प्रतिनिधियों द्धारा।  

इसके लिए, घर-घर जाकर पता करना, दूरभाष से कॉन्टेक्ट करना, डाक, उपभोक्ता कर्मचारी एवं दुकानों स्व-साक्षात्कार आदि तरिके अपनाये जाते है। 

मार्केटिंग के माध्यम (mediums of marketing)

किसी भी व्यवसाय की प्रगति में मार्केटिंग विशेष भूमिका का निर्वहन करती है व्यवसाय के प्रसार के लिए जरुरी है, मार्केटिंग के निम्न माध्यम हो सकते है -

घर-घर जाकर विक्रय - यह मार्केटिंग का प्राचीनतम माध्यम है जिसमे विक्रेता घर-घर जाकर वस्तु को बेचने का प्रयाश करता है | यह मार्केटिंग का सबसे प्रभावी माध्यम है, क्योकि इसमें विक्रेता का क्रेता से सीधा साक्षात्कार होता है, और विक्रेता अपने वस्तु के बारे में पूरी जानकारी प्रत्यक्ष सामने में बता सकता है। 

पैंफलेट्स, पोस्टर व होर्डिंग - यह भी मार्केटिंग की सर्वाधिक प्रभावी माध्यमो में से एक है जिसमे विक्रेता उत्पादन की विसिस्टियो का उल्लेख कर उसकी विशेषताओ से अवगत कराता है | इन उल्लिखित माध्यमों में से हम उत्पादन के सन्दर्भ में हम काफी विस्तार से विवरण दे सकते है, लेकिन पोस्टर में यह सिमित हो जाता है, इसलिए यह घर घर प्रचार से कम प्रभावशाली है। 

समाचार पत्र व् पत्रिकाएं - समाचार भी मार्केटिंग की प्रभावशाली व लोकप्रिय माध्यम है, वर्तमानं में शिक्षा के पर्याप्त प्रसार से आमजन के जागरूक हो जाने से मार्केटिंग के इस माध्यम के लोकप्रियता में और भी वृद्धि हुई है, उत्पादन इकाइयों में समाचार पत्रों का मार्केटिंग में उपयोग करने से एक लाभ और है बाज़ार विस्तार के सन्दर्भ में विचार विमर्श होता है 

प्रचार फिल्मे - प्रचार फिल्मे भी मार्केटिंग की एक प्रभावी माध्यम है, इस फिल्मो के माध्यम से उत्पादक अपने उद्देश्यों के अनुसार कम अवधि की फिल्मो का निर्माण करा लेते है जिसमे जिनमे उनके उत्पादों का गुणवत्ता को प्रमुखता दी गयी होती है। इन फिल्मों का सिनेमाघरों, टेलीविजन, इंटरनेट पर उपयोग कर लाभ अर्जित कर लिया जाता है।  

रेडियो व टेलीविजन - रेडियो व टेलीविजन भी मार्केटिंग के लोकप्रिय माध्यमों में सुमार है | इसमें टेलीविजन के माध्यम से तो अप्रत्यासित अपेक्षित लाभकारी परिणाम सामने आ रहे है | टेलीविजन आज रेडियो से भी अधिक प्रयोग में आने वाला माध्यम है, और इसके विस्तार रूप केबिन नेटवर्क ने टेलीविजन के माध्यम से मार्केटिंग को नई दिशाए दी है | 

इंटरनेट (internet) - इंटरनेट वर्तमान में मार्केटिंग के सबसे प्रभावी माध्यम के रूप में उभरकर आया है, इसने मार्केटिंग से जुड़े लोगो के लिए अपने विस्तार के नए नए मार्ग खोले है | 

डाक या कुरियर द्धारा - डाक या कुरियर के द्वारा भी आज मार्केटिंग उपलब्ध है, परन्तु मार्केटिंग के इस माध्यम में अपनी कुछ सीमाएं है, इसलिए आपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाता है। 

बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (business process outsourcing)- BPO मार्केटिंग का आधुनिकतम माध्यम है जो प्रचालनात्मक गतिविधियों को उत्पादक की इक्षा के अनुसार अंजाम देते है, इनमे मार्केटिंग के लिए कॉल सेंंटरो के रूप में BPOs का उपयोग किया जाता है, इसकी विविध विशेस्ताओ के कारन यह वर्तमान में सबसे लोकप्रिय माध्यम है, परिणाम भी अपेक्षा के अनुरूप आता है। 

प्रचार एवं विज्ञापन - उद्देस्य 
विज्ञापन के प्रमुख क्षेत्र या उद्देश्य निम्न है -

  • उत्पादन की विक्री बढ़ाने के लिए उपभोक्ता में विश्वास पैदा करना | 
  • विज्ञापन दाता की साख को बनाना एवं उसमे वृदि करना |  
  • उत्पादन के विषय में लोगो को शिक्षित करना | 
  • यह लोगो को स्व-रोजगार देता है | 
  • यह प्रेस की आमदनी को बढ़ाता है | 

विज्ञापन का प्रभाव (effect of advertisement) व्यापार के क्षेत्र में विज्ञापन का प्रभाव बहुत अधिक होता है | विज्ञापन के द्धारा ही उपभोक्ता को उत्पादन उसकी गुणवत्ता व उसके उपयोग के विषय में जानकारी प्राप्त होती है | किसी उत्पादन की विक्री बढ़ाने में उसके प्रभावी विज्ञापन का बड़ा महत्व होता है | आज का युग विज्ञापन का युग है इसके द्धारा कोई भी उद्यमी अपने उत्पादन की मांग में वृद्धि कर सकता है | दूसरे सब्दो में कहा जाए तो, किसी उत्पादन की मांग उसके विज्ञापन पर भी निर्भर करती है, परन्तु विज्ञापन का सारा व्यय उपभोक्ता की जेब से होता है। 

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अंतिम शब्द -
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