हर कोई अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं

यहाँ तो सब लगे हैं अपना उल्लू सीधा करने में 


एक समय कि बात है एक हंस और हंसिनी वातावरण प्रकृति का मजा लेते हुए घूमते-घूमते एक वीरान रेगिस्तान जैसे जगह पर पहुंच जाते हैं। 

हंसिनी ने हंस से कहा ये हम किस उजड़े हुए इलाके में आ गये हैं ?

यहाँ तो ना ही जल है, ना जंगल है और ना ही यहां ठंडी हवा चल रही है। यहां तो हमारा जीना ही मुश्किल हो जायेगा। 


हंस और हंसिनी को भटकते-भटकते रात हो गयी, तो हंस ने हंसिनी से कहा देखो रात भी गई इसलिए हम किसी भी तरह यहाँ आज की रात बिता लेते हैं, फिर सुबह होते ही यहाँ से चले जायेंगे। 


har-koi-laga-hai-apna-ullu-sidha-karne-me-hindi
हर कोई अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं 


जब रात हुई तो हंस और हंसिनी एक पेंड पर बैठे हुए थे, उसी पेंड पर एक उल्लू भी बैठा हुआ था। 

वह उल्लू जोर से चिल्लाने लगा। 

हंसिनी ने कहा - कैसा जगह है ये यहां तो रात में भी नहीं सो सकते। ये उल्लू अब चिल्ला-चिल्ला कर परेशान कर रहा है। 


हंस ने हंसिनी को समझाते हुए कहा कि किसी तरह यहाँ आज की रात काट लेते हैं, क्योंकि अब मुझे समझ आ गया है कि यह जगह इतना सुनसान क्यों है। इस तरह का उल्लू जिस जगह पर रहेगा वहां वीरान तो रहेगा ना। 


पेंड पर बैठा उल्लू हंस हंसिनी की इन बातों को सुन रहा था। 


जब सुबह हुई तब उल्लू निचे आया और उसने कहा कि हंस भाई मेरे वजह से आप को रात में में तकलीफ हुई उसके लये मुझे क्षमा करें 

हंस ने कहा कोई बात नहीं उल्लू भाई आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। 


ऐसा बोलकर हंस अपनी हंसिनी के साथ वहां से निकलने लगा, तभी उल्लू चिल्लाया। 

अरे हंस मेरी पत्नी को लेकर कहाँ जा रहे हो। 

हंस चौंका और बोला - आपकी पत्नी ?

अरे उल्लू भाई यह हंसिनी है मेरी पत्नी है रात में हम दोनों साथ में आये थे अब साथ में जा रहें हैं। 


उल्लू ने कहां - तुम चुप रहो, यह मेरी पत्नी है। 

अब दोनों के बीच वाद-विवाद शुरू हो गया हंस कहता मेरी पत्नी है और उल्लू कहता मेरी पत्नी है। खबर सब तरफ आग कि तरह फैल गयी और आस पास के पक्षीगण एकत्रित हो गए। कई गांव की जनता बैठी, पंचायत बुलाई गयी, सब पंचलोग उपस्थित हुए। 


पंचलोग बोले - भाई किस बात का विवाद हो रहा है। 

सभी ने बताया कि उल्लू कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है और हंस कह रहा है कि हंसिनी उसकी पत्नी है। 


फिर लम्बी बैठक और पंचायत के बाद पंच लोग किनारे हो गए और कहा कि भाई बात तो यह सहीं है कि हंसिनी हंस की पत्नी है परन्तु ये तो थोड़ी देर में चले जाएंगे परन्तु हमारे बीच उल्लू को तो हमेसा रहना है। इसलिए फैसला को उल्लू के हक में सुनाना चाहिए। 


फिर क्या था पंचों ने अपना फैसला सुनाया कि सारे गवाहों और सबूतों को मद्दे नजर रखते हुए पंचायत इस नतीजे पर पहुंची है कि हंसिनी, उल्लू की ही पत्नी है। और हंस तत्काल गांव छोड़कर यहाँ से जाये। 


यह सुनकर हंस बेचारा हैरान था वह रोने, बिलखने लगा कि पंचायत ने गलत फैसला सुनाया है, उसके साथ अन्याय हुआ है। उल्लू ने मेरी पत्नी लेली ऐसा कहते हुए रोते बिलखते वह वहां से जाने लगा। 

तब उल्लू ने हंस को आवाज लगाई - हे मित्र हंस, रुको कहां जा रहे हो। 


har-koi-laga-hai-apna-ullu-sidha-karne-me-hindi
हर कोई अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं 


हंस ने कहा अब क्या हुआ भैया, पत्नी तो आपने ले ही ली अब क्या मेरी जान भी लोगे। 

उल्लू बोला - नहीं मित्र हंसिनी तुम्हारी ही पत्नी है और तुम्हारी ही रहेगी। 

कल रात जब मै चिल्ला रहा था तो आपने अपनी पत्नी से कहा था कि यह इलाका इतना उजड़ा और वीरान इसलिए है क्योंकि यहां उल्लू रहता है। 


मित्र ऐसा नहीं है, बल्कि यह इलाका इतना वीरान इसलिए है क्योंकि यहाँ हर कोई अपना उल्लू सीधा करने में लगा है।  


अंतिम शब्द -

आशा है की आपको हमारा यह लेख हर कोई अपना उल्लू सीधा करने में लगे हैं पसंद आये, अगर आपको हमारा यह लेख अच्छी लगे तो इसे जरूर shear करें और हमारे Facebook page को follow जरूर करें व हमारे लिए कोई सुझाव हो तो हमें comment करें - धन्यवाद


इन्हे भी पढ़ें डिमांड में हैं :

टिप्पणी पोस्ट करें

नया पेज पुराने